बस जाऊँ एक याद बन कर..

जी करता है कि अपनी सांसों को अलविदा कह कर हम बस जाएं आपके रग-रग में, सांस बनकर और शामिल हो जाऊँ धड़कन बन कर, शामिल हो जाऊँ आपके जेहन में दुआ बन कर,  एक हसीन याद बनकर।शामिल हो जाऊँ उन गुजारे लम्हों की चाह बनकर.. टूटती सांसो की डोर बन कर..

वजह..

एक अकेला इस शहर में आशियाना ढूँढता है..मरने की तो है तमाम वजहें, जीने का बहाना ढूँढता है।।एक अकेला इस शहर में इक जाना पहचाना ‘शख्स’ ढूँढता है, बस जीने का बहाना ढूँढता है..

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