बस जाऊँ एक याद बन कर..

जी करता है कि अपनी सांसों को अलविदा कह कर हम बस जाएं आपके रग-रग में, सांस बनकर और शामिल हो जाऊँ धड़कन बन कर, शामिल हो जाऊँ आपके जेहन में दुआ बन कर,  एक हसीन याद बनकर।शामिल हो जाऊँ उन गुजारे लम्हों की चाह बनकर.. टूटती सांसो की डोर बन कर..

वजह..

एक अकेला इस शहर में आशियाना ढूँढता है..मरने की तो है तमाम वजहें, जीने का बहाना ढूँढता है।।एक अकेला इस शहर में इक जाना पहचाना ‘शख्स’ ढूँढता है, बस जीने का बहाना ढूँढता है..

सबकुछ खो दिया।।

आज यूँही अनजाने में उस रास्ते गया जहाँ ना जाने कितने झूठे वादे और झूठी कसमे खाकर मेरे वजूद को चंद लम्हों का मेहमां बना दिया..तुमने तो मुझे पा लिया पर हमने न जाने कितना कुछ खो दिया.. खोई हमने वो आँखों में प्यार की परछाई जिसमे मुहब्बत देखी थी हमने कभी, वो बहके सेContinue reading “सबकुछ खो दिया।।”

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